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भारतीय युवाओं में तेजी से बढ़ रही है हार्ट अटैक की समस्या !!!

भारतीय युवाओं में हृदयाघात (हार्ट-अटैक) की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और 2030 तक सबसे अधिक मौतें हृदय रोग के कारण ही होगी। दिल के दौरे का संबंध सबसे पहले बढ़ती उम्र के साथ माना जाता था, लेकिन अब अधिकतर लोग उम्र के तीसरे और चौथे दशक के दौरान ही दिल की बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। आधुनिक जीवन के बढ़ते तनाव ने युवाओं में दिल की बीमारियों के खतरे को बढ़ा दिया है। हालांकि आनुवांशिक और पारिवारिक इतिहास अब भी सबसे आम और अनियंत्रित जोखिम कारक बना हुआ है, लेकिन युवा पीढ़ी में अधिकतर हृदय रोग का कारण फेटी फूड और फास्ट फूड का अधिक सेवन, शराब, शारीरिक काम की जगह दिन भर कंप्यूटर पर एक ही जगह बैठ कर दिन भर काम करना, अत्यधिक तनाव, और लगातार लंबे समय तक अनियमित नींद, धूम्रपान और आराम तलब जीवनशैली भी 30 से 40 साल के आयु वर्ग के लोगों में हार्ट ब्लॉवकेज और हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा रही है।

हार्ट ब्लॉवकेज के लक्षण

हार्ट ब्लॉवकेज होने के लक्षण की बात करें तो यह इस पर निर्भर करता है कि आपको किस डिग्री की ब्लॉ्केज हैं। फर्स्ट डिग्री हार्ट ब्लॉसकेज का कोई खास लक्षण नहीं होता। सेकेंड डिग्री और थर्ड डिग्री हार्ट ब्लॉ केज में दिल की धड़कनें निश्चित समय अंतराल पर न होकर रूक-रूक कर होती है। इस तरह की हार्ट ब्लॉलकेज के अन्य लक्षण चक्कर आने या बेहोश हो जाना, सिर में दर्द रहना, थोड़ा काम करने पर थकान महसूस होना, छोटी सांस आना, सीने में दर्द रहना आदि है। इनमें से कोई लक्षण आपको अन्य किसी बीमारी के होने पर भी हो सकता है।

सभी हृदय रोगियों में एक जैसे लक्षण नहीं होते

बदलती जीवनशैली और टेंशन ने दिल की बीमारियों का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा दिया है। पहले माना जाता था कि वैसे लोग जो मोटापे के शिकार हैं, ज्यादा तला भुना और चिकनाई वाला खाना खाते हैं और शराब का ज्यादा सेवन करते हैं उन्हें ही दिल की बीमारी होती है, लेकिन अब 30-40 साल के युवा भी दिल की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, और इसका छाती का दर्द सबसे आम लक्षण नहीं है, कुछ लोगों को अपच की तरह असहज महसूस हो सकता है और कुछ मामलों में गंभीर दर्द, भारीपन या जकड़न महसूस हो सकता है। आमतौर पर दर्द छाती के बीच में महसूस होता है, जो बाहों, गर्दन, जबड़े और यहां तक कि पेट तक फैलता है, और साथ ही धड़कन का बढ़ना और सांस लेने में समस्या होती है। धमनियां पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती हैं, तो दिल का दौरा पड़ सकता है, जो हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। दिल के दौरे में होने वाले दर्द में पसीना आना, चक्कर आना, जी मचलना और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं

क्या होता है हार्ट ब्लॉकेज:

जैसा की हमें मालूम है कि एक स्वस्थ दिल सामान्य रूप से एक मिनट में 60-100 बार धड़कता है। यह धड़कन हृदय की मांसपेशियों के सिकुड़ने के कारण होती है जिससे पूरे शरीर में ब्लड का बेरोक-टोक प्रवाह होता है। लेकिन जब यह मांसपेशियों में सिकुड़ने और फैलने में रुकावट आती है तब इस स्थिति को हार्ट ब्लॉकेज कहा जाता है। इसके कारण हृदय की धड़कन में रुकावट आने लगती है और हार्ट-बीट कम होकर मिस होने लगती है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि हार्ट ब्लॉकेज से हृदय के सामान्य काम-काज में रुकावट आने लगती है। 

क्यों होता है हार्ट ब्लॉकेज:

सामान्य रूप से जब हृदय की धमनियों में खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ने और जमने लगता है तब आर्टरी में ब्लड का फ़्लो बाधित हो जाता है। इस कोलेस्ट्रॉल के बनने और जमा होने का कारण शरीर में ज़रूरत से अधिक चिकनाई या वसा (Fat) का जमा होना माना जाता है। जमे हुए इस रक्त के थक्कों को प्लाक्स कहा जाता है जो अगर आर्टरी में जम कर सख्त होने पर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

कैसे पहचानें हार्ट ब्लॉकेज :

  • छाती के बाएँ हिस्से में अचानक हल्का या तेज़ दर्द होना जो कभी-कभी कोहनी के ऊपर, कंधे या जबड़े तक फैल सकता है
  • छाती में आगे के हिस्से या पीछे के हिस्से या दोनों जगह तेज़ दर्द के साथ सांस लेने में परेशानी होना
  • उल्टी जैसा महसूस होना, चक्कर आना और बहुत बैचेनी होना
  • अत्याधिक पसीना आना या फिर बेहोशी आना

बाई-पास या एंजियोप्लास्टी के बाद हार्ट ब्लॉवकेज

अगर आपने बाई पास या एंजियोप्लास्टी करवा रखी हैं तब भी आप को हार्ट ब्लॉवकेज हो सकता हैं। क्योंकि एंजियोप्लास्टी करवाने के बाद स्टंट के आस पास अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रोल जमना शुरू हो जाता हैं और थोड़े समय के बाद दोबारा एंजियोप्लास्टी या बाई-पास करवाना पड़ सकता है

हार्ट अटैक, ह्रदय घात या दिल का दौरा

हार्ट अटैक, ह्रदय घात या दिल का दौरा, इन तीनों शब्द का मतलब एक ही है। दिल का दौरा किसे और कब आ जाए यह कोई नहीं जानता। इसका कोई निश्चित समय नहीं होता है। कभी-कभी तो इसका कोई संकेत भी नहीं मिल पाता है। दरअसल, शरीर में खून पहुंचाने के लिए दिल किसी पंप की तरह काम करता है, और इस पंप को चालू रखने के लिए दिल तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका को ही कोरोनरी ऑरटरी कहा जाता है। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं होता कि वे कोरोनरी ऑरटरीज डिजीज से पीड़ित हैं। पीड़ित लोगों को या तो सांस लेने में परेशानी होती है या फिर पैर और टखनों में सूजन आ जाती है। और एक समय ऐसा आता है जब दिल से जुड़ी उनकी ऑरटरी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है और तभी दिल का दौरा पड़ता है।

हार्ट ब्लॉजकेज का आयुर्वेदिक इलाज

आधुनिक समय में न केवल भारत में बल्कि सम्पूर्ण विश्व ने आयुर्वेद के उपचार को अधिक सुरक्षित और उपयोगी माना जा रहा है। हार्ट ब्लॉकेज और कोलेस्ट्रॉल का आयुर्वेदिक उपचार भी इसी प्रकार सरल और बिना किसी प्रकार के साइड इफेक्ट के होता है। इसके लिए घर में आसानी से उपलब्ध होने वाली विभिन्न चीजें जैसे अदरक, लहसुन, नींबू, ऐपल साइडर विनेगर, शहद और अर्जुन छाल, दालचीनी, अश्वगंधामेथी, कुटकी, पिप्पली आदि के प्रयोग से सरलता से बिना किसी ट्रीटमेंट के ही हार्ट ब्लॉकेज को खोला जा सकता है। ये आयुर्वेदिक औषधि हार्ट ब्लॉकेज को खोलने ओर एल।डी.एल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, को कम करने में मदद करती है, यह सभी चीज़ें ब्लड में फैली अम्लीयता को दूर करके उसमें जमे प्लाक्स को दूर करने का काम करती हैं। आयुर्वेद में हार्ट ब्लॉजकेज ओर कोलेस्ट्रॉल का सुरक्षित इलाज बिना साइडइफ़ेक्ट के बहुत सरल व प्रभावी है

 
हार्ट ब्लॉकेज, हॉर्ट अटैक एंड कोलेस्टेरोल में फायदेमंद जड़ी बूटियां


दालचीनी

दालचीनी दिल से जुड़ी कई समस्याओं में उपयोगी है। दालचीनी आपके हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को कम कर, अच्छे कोलेस्ट्रॉल के स्तर को स्थिर करती है। इससे दिल के दौरे का खतरा भी कम होता है। हैं  दालचीनी में  फेनोलिक यौगिक और फ्लैवोनॉइड मौजूद हैं, जो एंटी-इन्फ्लेमेटरी, एंटीडाइबेटिक, एंटीकैंसर और कार्डियोप्रोटेक्टीव गुण प्रदान करते हैं । इसमें कई एंटी-ऑक्सीडेंट, फाइबर और कैल्शियम भी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं। दालचीनी में ऐसे शक्तिशाली एंटी-डायबिटिक प्रभाव होते है जो ब्लड में शुगर लेवल को कम करते है। दालचीनी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट डायबिटीज होने के एक महत्वपूर्ण कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है।

अर्जुन छाल 

अर्जुन छाल में कार्डियोप्रोटेक्‍टीव और हृदय को मजबूत करने वाले कई गुण होते है।  यह हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करने और हृदय द्वारा खून को पूरे शरीर में पहुंचाने की क्षमता में वृद्धि करता हैं। इसके अलावा इसके सेवन से हार्ट अटैक का खतरा भी दूर रहता हैं। अर्जुन छाल में मौजूद प्रोटीन व अन्य गुण हाई बल्ड प्रैशर को कम करने में सहायक होते हैं।

कुटकी

कुटकी रक्त में सीरम क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड तथा इलेक्ट्रोलेट्स के स्तर में सुधार करता है। कुटकी लीवर सिरोसिस  को जड़ से खत्म करने में सक्षम मानी जाती है। कुटकी में एंटीबैक्टीरियल और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण रक्त विकार, और ह्रदय रोग जैसी परेशानियां दूर की जा सकती है। और कुटकी रक्त को साफ करने में सहायक सिद्ध होती है। । कुटकी के प्रयोग से पाचन तंत्र बेहतर बनता है और गैस्ट्रिक स्त्राव ठीक रहता है। कुटकी पाचन तंत्र में उत्तेजना पैदा करती है जिससे इंसुलिन का स्त्राव बेहतर ढंग से होता है। इस तरह यह ग्लाइकोजन के रूप में खून में शुगर के संचय को रोक कर लीवर को फायदा पहुंचाती है। इस वजह से यह मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत लाभदायक सिद्ध होती है।

पीपली

पीपली लीवर को स्वास्थ्य बनाये रखने में मदद करता है क्योंकि इसमें पिपेरिन नामक तत्व पाया जाता है जो कि लीवर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखकर लीवर के कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता  है।  पिप्पली कोलेस्ट्रॉल को कम करती हैं। यह पाचन संस्थान को शक्तिशाली बनाती है और कफ का नाश करती है।

मेथी

मेथी के दाने में घुलनशील फाइबर होता है, जो पाचन की क्रिया को धीरे कर देता है। यह कार्बोहाइड्रेट के पाचन और अवशोषण की दर को कम कर देता है। मेथी के दाने रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करते हैं । शोध के अनुसार मेथी के दानों में कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता है। खासकर, यह एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को शरीर से खत्म करने में कारगर है। मेथी के दानों में नारिंगेनिन नामक फ्लेवोनोइड होता है। यह रक्त में लिपिड के स्तर को कम कर सकने में सक्षम होता है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जिस कारण मरीज का उच्च कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है।  मेथी के सेवन से दिल का दौरा पड़ने की आशंका कम होती है। मेथी के दानों में अधिक मात्रा में फाइबर होता है। फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। मेथी के दानों में पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड पाया जाता है, जो किडनी को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। साथ ही यह किडनी के आसपास एक रक्षा कवच का निर्माण करता है।

अश्वगंधा

अश्वगंधा में एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद हैं। इस कारण यह ह्रदय से जुड़ी तमाम तरह की समस्याओं को दूर कर सकता है। अश्वगंधा ह्रदय की मांसपेशियां मजबूत और खराब कोलेस्ट्रोल का स्तर कम करने में मदद कर सकता है। अश्वगंधा में भरपूर मात्रा में हाइपोलिपिडेमिक पाया जाता है, जो रक्त में खराब कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद कर सकता है। अश्वगंधा के जरिए डायबिटीज से भी बचा जा सकता है। इसमें मौजूद हाइपोग्लाइमिक गुण, ग्लूकोज की मात्रा को कम करने में मदद कर सकता है।

अदरक

अदरक में जिंजरोल नामक खास तत्व मौजूद होता है, जो रक्त प्रवाह को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ दर्द को दूर करने का काम कर सकता है  अदरक को लेकर किए गए शोध में इसमें मौजूद एंटी-डायबिटिक, हाइपोलिपिडेमिक और एंटी-ऑक्सीडेटिव गुणों के बारे में पता चला है, जो मधुमेह के रोगियों में शुगर की मात्रा को संतुलित करने का काम कर सकता है

लहसुन

लहसुन एंटी-वायरल, एंटी-फंगल, एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है। इसमें एलीसीन (Allicin) और दूसरे सल्फर यौगिक मौजूद होते हैं। साथ ही लहसुन में एजोइन (ajoene) जैसा तत्व और एलीन (allein)  जैसा यौगिक भी मौजूद होता है, जो लहसुन को और ज्यादा असरदार औषधि बना देता हैं। लहसुन में बायोएक्टिव सल्फर यौगिक, एस-एललिस्सीस्टीन मौजूद होता है, जो ब्लड में कोलेस्ट्रॉल कम करता है। लहसुन के सेवन से शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्रॉल (जो कि हानिकारक कोलेस्ट्रॉल होता है) के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का ह्रदय संबंधी रोगों से सीधा रिश्ता होता है। ऐसे में लहसुन का सेवन ह्रदय संबंधी रोगों की रोकथाम में असरदार साबित हो सकता है।

नींबू

नींबू में मौजूद पॉलीफेनॉल्स बढ़ते मोटापे को नियंत्रित कर सकते हैं । नींबू शरीर से फैट को कम करने में मदद करता है। साथ ही हृदय रोग के जोखिम को भी कम करता है। नींबू विटामिन-सी बड़ा स्रोत है और विटामिन-सी कोरोनरी हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है

सेब का सिरका

सेब के सिरके में मौजूद एंटी ग्लाइसेमिक गुण ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं  सेब का सिरका कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी मदद कता है। इसमें पेक्टिन होता है, जो शरीर के अंदर से खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करता है सेब का सिरका आपके शरीर से विषैले पदार्थ बाहर कर शरीर को डिटॉक्स करने का भी काम करता है। सेब के सिरके में एंटीऑक्सीडेंट तत्व पाए जाते हैं, जो आपके शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं।

शहद

शहद औषधि गुणों से भरपूर एक प्राकृतिक खाद्य पदार्थ है, शहद में विटामिन-ए और बी पाया जाता है। इसमें फैट नहीं होता, इसलिए यह वजन घटाने में मदद करता है। हनी शरीर की अतिरिक्त चर्बी को खत्म करता है । मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए आप कई प्रकार से शहद का सेवन कर सकते हैं। हनी में काफी मात्रा में माइक्रो न्यूट्रिएंट पाए जाते है, जो मधुमेह के पीड़ित लोगों के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं। नियमित रूप से इसका सेवन हाइपरग्लेसेमिया (उच्च रक्त शर्करा) को कम कर देता है। शहद में पोटेशियम और सोडियम जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए लाभदायक होते हैं। शहद फेनोलिक यौगिक घटकों से समृद्ध होता है, जो प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है। शहद में मौजूद फेनोलिक घटकों की कड़ी में क्वार्सेटिन, कैफीक एसिड फेनेथिल एस्टर, एसीसेटिन, कैम्फेरोल व गैलांगिन आदि शामिल होते हैं, जो हृदयवाहिका रोगों के इलाज में फायदा पहुंचाते हैं

 

आयुर्वेद के दो बेहतरीन योग एक साथ

आयुर्वेदिक क्लियर-हार्ट लिक्विड लहसुन, अदरक, निबु, ऐपल साइडर विनेगर ओर शहद का शुद्ध मिश्रण है।

आयुर्वेदिक क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल अर्जुन छाल, दालचीनी, अश्वगंधामेथी, कुटकी, पिप्पली से बना है।

क्लियर हार्ट लिक्विड में मौजूद अदरक रक्त को पतला बनाने और हार्ट की पम्पिंग को बढ़ाने में मदद करता है, लहसुन खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद करता है. नींबू रक्त वाहिकाओं को कोमल और मुलायम बनाए रखता है। एप्पल साइडर विनेगर रक्त से कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड, टॉक्सिन, और फैट को कम करने में मदद करता है, और शहद हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर के खतरों को कम करता है। उस से ब्लड प्राकृतिक तरह से थिन हो कर हार्ट-ब्लॉकेज, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, वैरिकाज-वेंस, और रक्त वाहिकाओं के प्रवाह में रुकावटों को दूर करने में मदद करता है, एवं शरीर (बॉडी) को डिटॉक्सीफाई कर कई प्रकार की बीमारियों से बचाव में मदद करता है।

क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल में मौजूद अर्जुन छाल हृदय की धमनियों मजबूत रखने और हृदय की धड़कन नियंत्रित रखने में मदद करता है। दालचीनी हृदय की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल को जमने से रोकती है और ब्लड में शुगर  को कम करने में मदद करती है। कुटकी शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालकर लीवर, किडनी को हेल्दी रखते हैं। पीप्पली मोटापा, कोलेस्ट्रॉल कम करने और हृदय रोगों में लाभकारी है। अश्वगंधा - बीपी और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करता है। मेथी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कम करने और ब्लड के फ़्लो को नियमित करने में मदद करती है।

क्लियर हार्ट इंडिया का बेस्ट हार्ट टॉनिक क्यों है?

आयुर्वेदिक क्लियर हार्ट 100 प्रतिशत प्राकृतिक और शुद्ध जड़ी बूटियों के साथ तैयार किया जाता है, यह 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को दिल से जुड़ी किसी भी समस्या से बचाने में मदद करता है। इसके अलावा, दिल से संबंधित समस्याओं के पारिवारिक इतिहास वाले लोग इस पर भरोसा कर सकते हैं, आयुर्वेदिक क्लियर हार्ट के उपयोग से 45-60 दिनों के भीतर बेहतर परिणामों मिलने शुरू हो जाते है।

क्लियर हार्ट लिक्विड और क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल का सेवन करने वाले ग्राहकों की एक बड़ी संख्या ब्रांड में अपना विश्वास रखते है और लगभग 90 प्रतिशत उपयोग करने वाले उन सभी लोगो के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, और हृदय की समस्याओं में लाभकारी सिद्ध हुआ हैं। आयुर्वेदिक क्लियर हार्ट में किसी भी तरह का केमिकल, प्रिजर्वेटिव नहीं मिलाया जाता है आयुर्वेदिक क्लियर हार्ट पूरी तरह से प्राकृतिक है।

 

क्लियर हार्ट लिक्विड और क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल का कैसे इस्तेमाल करे ?

अपने शरीर को स्वस्थ और हार्ट को तंदुरुस्त रखने के लिए क्लियर हार्ट लिक्विड और क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल  को बिना किसी डर के लें सकते हैं।

हार्ट ब्लॉकेज, कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेसर की समस्या के लिए प्रतिदिन सुबह खाली पेट आधा गिलास कुनकुने गरम पानी लें और इसमें दो चम्मच (20 एमएल) क्लियर हार्ट लिक्विड मिलाएं। इसे रोजाना सुबह खाली पेट पिएं। सुनिश्चित करें कि आप अगले आधे घंटे तक कुछ भी सेवन न करें। और सुबह के नाश्ते के बाद 1 क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल और शाम को खाने के बाद 1 क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल लें।। यह १००% साइड इफ़ेक्ट रहित मेडिसिन है

अच्छे परिणाम के लिए 6 महीने नियमित लें।

हार्ट ब्लॉकेज से रोकथाम इलाज से बेहतर है।

35 वर्ष से ऊपर प्रत्येक व्यक्ति को वर्ष में 3 माह क्लियर हार्ट लिक्विड और क्लियर हार्ट प्लस कैप्सूल लेना चाहिए जिससे शारीरिक ताकत बनी रहे एवं शरीर में उपस्थित अनावश्यक विषैले पदार्थो बाहर निकल जाये

मुझे अच्छे परिणाम लेने के लिए कब तक इसे लेना होगा?

क्लियर हार्ट को लेने वाले अधिकतर ग्राहक इस बात से संतुष्ट होकर कहते हैं कि उन्हें एक / दो माह के अंत तक संतोषजनक परिणाम देखने को मिल जाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह एक सप्लिमेंट है अच्छे परिणाम के लिए 6 महीने नियमित लें।  इसका सेवन वे एक अच्छी आदत के रूप में अपनी नियमित डाइट के साथ जारी रख सकते हैं। अंतिम परिणाम के रूप में इसके सेवन के बाद एक स्वस्थ हृदय और शरीर को प्राप्त करना हो सकता है

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